अपनी रिज़र्व सीट पर नहीं बैठ पाये थे, अब रेलवे देगा 75000 हर्जाना

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दिल्ली की राज्य उपभोक्ता अदालत ने फैसला सुनाया है कि रेल मंत्रालय, यात्री विजय कुमार को 75000 रुपये हर्जाना दे क्योंकि सफर के दौरान, रिजर्व सीट पर दूसरे पैसेंजर्स के कब्जे से उन्हे परेशानी झेलनी पडी थी.

NDTV के मुताबिक अदालत ने यह भी फैसला सुनाया है कि हर्जाने की राशि में से 25000 रुपये उस टीटीई की तनख्वाह से काटा जाये जो यात्रा के दिन उस कोच का प्रभारी था, और पीड़ित यात्री को उसकी रिज़र्व सीट दिलाने में असफ़ल रहा.

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पीड़ित यात्री विजय कुमार ने अपनी शिकायत में बताया था कि मार्च 2013 में जब वे दक्षिण-एक्सप्रेस में विशाखापत्तनम से नई दिल्ली का सफ़र कर रहे थे तब एक दूसरे यात्री ने उनकी (विजय कुमार की) सीट पर जबरन बैठे थे और नहीं उठ रहे थे.

कुमार के घुटनों में दर्द था और उन्होंने लोअर-बर्थ बुक की थी. लेकिन बीना(मध्य प्रदेश) में कुछ लोगों ने उनकी बर्थ पर जबरन कब्ज़ा कर लिया था और नहीं खाली कर रहे थे.

कुमार, टीटीई से शिकायत करना चाहते थे लेकिन टीटीई नहीं मिला.

ट्रेन में सफ़र के दौरान ऐसा वाकया अक्सर होता है कि जब आपकी सीट/बर्थ रिज़र्व हो तो कोई दूसरा व्यक्ति आपकी सीट/बर्थ पर जबरन बैठा रहता है. उपभोक्ता अदालत के यह फ़ैसला रेल प्रशासन के लिए कड़ा सन्देश है कि सभी यात्रियों को उनकी रिज़र्व सीट मिले और टीटीई निश्चित करे कि कोई अनधिकृत व्यक्ति, किसी दूसरे की रिज़र्व सीट पर जबरन कब्ज़ा न करे.

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